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Thursday, February 2, 2017

क्यू  रात  को   इतना   हक  देते  हो  यार ,

जो  तेरे  चेहरे  की  उदासी  का  सबब  बने ,

कर   यू   खूद   को   आजाद

हर   उड़ान    नयी    उड़ान   का    सबब    बने ,

रातों    को    कर   के   कुरबां    दिन    के    उगते   
सूरज   का   सबब  बने , 

मेहनत  तो  कम ना  थी , मगर ,

किस्मत से तेरी  ठन  गयी ,

मुद्दतों  बाद  कोई  दुश्मन  खास  बना  है , 

" यार " 

पर हम  खयाल  कुछ  यूँ  , रखेंगें  तेरा 

ऐ  किस्मत  हम  खयाल कुछ  यूँ  रखेंगें  तेरा , 

जैसे  " रूख "  हवाओं  का  मोड़  दियां  करते  हैं  , 

पंछीं  छोटे  छोटे  पंखों  से  अपने , 
हम  तो  शौक  से  जीतें हैं , जिन्दगी , 
और  तुम  कहते  हो बच्चों  सी जिद  छोड  दो ,
खवाबो  को अपने  कुछ  ओर कर  दो , 
कैसे  अब  हम  ये कह दें , 
तुम से , 
तुम भी  खवाब  ही  थे , हमारे 

Saturday, January 30, 2016

 tasvir  mein muskratein chero ki sachai kya hoge..kabhi ghor keya ya ..bas maan leya ..inke 

damaan mein bas khushiyan he rahi hoge..,khabar kise hai ..khash har ek haqikat tasvir -aye-

haqikat hoti..,.
क्या इसी का नाम महोबत हैं

दर्द दे कर दर्द पूछतें हैं
गज़ब की मोहबत करते हैं
खुद ही ज़ख़्म और खुद ही दवा करते हैं
साथ भी छोड़ना हैं और हमसफ़र  भी बनतें हैं
अज़ब की दुनीया हैं
यादें भी देती हैं और भुलाना भी पड़ता है ,
क्या इसी का नाम महोबत हैं ,

Wednesday, January 29, 2014

देश का शराबी पति...( राजनीति )

 


देश का शराबी पति...( राजनीति )   

आज भारत की राजनीति में काफी उथल - पुथल का दौर चल रहा  है , कुछ इस उथल  - पुथल के पक्ष में हैं तो कुछ विपक्ष में ऐसा होना स्वभाविक भी हैं  .आखिर भारत में सब को अपने पक्ष विपभ और भेद मतभेद रखनें का अधिकार है .यही  गुण हमारे लोकतंत्र को सफल बनाने में महत्वपूर्ण  भूमिका अदा करता हैं,१६ वें लोकसभा चुनाव का समय जैसे - जैसे  करीब आ रहा है...वैसे - वैसे ही राजनीतिक दलों में हलचल तेज़ होती जा रही है.राजनीतिक दलों की हलचल भी तो स्वभाविक है , क्योंकि उनकी बरसो पुरानी रणनीतियों पर उनके बरसों पुराने प्रचलन पर स्वाल  उठनें लगें हैं . जिसका असर देश के हर क्षेत्र में  नजर आने लगा है , अब तक जो राजनीति से दूर रहतें थे या बस वोट डालनें तक अपना अधिकार समझतें थे..वह भी राजनीति के ढ़ंग को लेकर विचार विमर्श करनें लगें हैं , जिस मुद्दें को लेकर साधारण जनता के विचार शुन्य पड़े थे आज वह भी इसमें भाग लेने लगें हैं,अब साधारण लोग ये समझनें लगें हैं कि हम  जिन प्रश्नों  से बरसों से बच कर निकल रहें थे आज उन प्रश्नों का उत्तर खोजनें का समय आ गया हैं..कुछ प्रश्न इस प्रकार थे , जैसें देश की राजनीति भ्रष्ट्र हो चुकी है , भाई भतिजावाद सब और अपनी जड़ें फैला चुका है ,जिसका कारण राजनीति हैं,एक नेता का स्थान  सर्वोपरी हैं, देश का कुछ नहीं हो सकता , देश कब बदले गा आदि अनेक प्रश्न थे
 क्या हमारे पूर्वजों ने   देश आज़ाद इसलिए करवाया था , कि देश की आजादि गौरों से हस्तांत्तरित हो कर अपने देश के ही कुछ नेताओं  के हाथ में  चली जाए,..लोकतंत्र का नक़ाब पहन कर अपने लोग ही देश को खोखला करें , पर आज भारतवासी समझनें लगें हैं कि इन प्रश्नों से बचकर निकलना हमारा सबसे बड़ा दोष है.ये हमारी जिम्मेदारी है क्योंकि वोट देकर हम ही इन्हें हुकूमत सौंप कर सर्वोपरी बना रहें हैं ..आखिर हम क्यों ऐसे लोगों को चुन रहें है जो लोकतत्रं के पतन में भूमिका निभा रहें हैं..जो लोकतंत्र की परिभाषा को बदल कर प्रस्तुत करनें का प्रयास कर रहें हैं...आज देश में राजनीति की स्थिति को हम एक स्त्री के शराबी पति के उदाहरण से समझ सकतें हैं , एक स्त्री जिसका पति शराबी है और आमूमन वो अपनी पत्नी को पीटा करता है किन्तु सब सहती रहती है ,( यहां स्त्री एक देश है और शराबी पति देश की राजनीति है ) पत्नी जब जब बाज़ार जाती है या बाहर निकलती है तो वो अपने पिटाई के निशानों को छुपाने के प्रयास में लगी रहती है, यदि कोई देखने में कामयाब हो जाए और कारण पूछें तो भी वो बताना नहीं चाहती  कि उसके पति ने मारा है क्योंकि वो स्त्री अपने पति परमेश्वर की  संस्कृति  का प्रतिपालन करती है , वहीं जो आस - पड़ोस उस की हकिकत जानता है और उस स्त्री को अपने पति के अत्याचार के खिलाफ लड़ने को कहता है, विरोध करने को कहते है, उसे वो स्त्री अच्छा नहीं समझती और उसको आस पड़ोस जो उसका हितेशी बनना चाहतें हैं उसे ही अपना दुश्मन और माखौल उड़ाने वाला समझकर उस की शिकायत अपने पति  से ही कर बैठती है , जिसे जान कर शराबी पति सभंलने का प्रत्यन ना कर कर अपनी स्त्री को भी दोषी बतातें हुए यह कहता है , कि तुम आस पड़ोस से बात क्यों करती हो और फिर शराब पीकर अपनी स्त्री को खूब पीटता है, स्त्री पीटती रहती है,यही सोच कर कि , ये मेरा पति है मेरा परमेश्वर है , मेरा भगवान है , जिसका विरोध सही नहीं है , और वहीं उस स्त्री के नादान बच्चें माँ को पिता से पीटाई खाने की  संस्कृति को समझ नहीं पाते और अपने पिता के प्रति  घृणा की भावना उनमें जन्म लेने लगती है , तब उनमें से एक बच्चा जो विचारों में और तर्को के आधार पर समझ रखने में तेज होता है , अपने शराबी पिता का विरोध करता है और अपने माँ को सशक्त करने का प्रयास करता है तब उसके अन्य भाई बहन भी यह देख कर की शराबी पिता भाई के विरोध के कारण कुछ डर गया है कुछ नरम पड़ रहा है तब उनमें भी चेतना तेज होती है और अपनें हालातों को बदलनें की इच्छा का उदय होता है , इसी इच्छा - शक्ति के बल पर वे भाई अपने शराबी पिता के दूआरा अपनी माँ पर कए जा रहे हत्याचार को बंद कर पाते है और अपने  घर की तरक्की में योगदान दे पातें है , वही जब आस - पाड़ोस ये देख कर जब बच्चों की तारीफ करता है तब वही शराबी पति की पत्नी अपने बच्चों के प्रयास के कारण सही गलत का फर्क समझ पाती है और आस -पड़ोस से मेल जोल बढ़ाती है , ऐसी ही स्थिति से आज देश गुजर रहा है जब एक दिन सब स्थिर होगा इस उथल - पुथल के बाद और आने वाली पीड़ियां हमें इस बदलाव का जनक पाऐंगी तो हमारे सम्मान में भी बढ़ौतरी होगी..,


 

Wednesday, September 4, 2013

कभी 84 कोसी

 कभी  84 कोसी
 कभी   अयोध्या  वासी
 कभी राम मंदिर 
कभी अखाडा बना 
कभी सवाल बना 
कभी पुकार बना 
कभी बना कभी मिटा 
ऐसा इतिहास बना 
दोराहतें हैं कुछ तत्व इसे 
कभी हक के नाम पर 
कभी अल्लहा के नाम पर 
तो कभी राम के नाम पर 
जब जब ये सिलसिला चला 
मानो  लाखों  का खून बहा
और कितनी बलि चढाओगे 
कभी किसी के नाम पर 
कभी किसी के नाम पर 
कभी सन्नाटा तो कभी शोर बना 
होश में आ जाओ,
ईश्वर भी अब रोने लगा 
पछताने लगा 
कभी सोचने लगा 
क्यों मैंने अपना प्रतिबिम्ब  गढ़ा 
खाली  था संसार फिर क्यों मैंने इसे भरा 
कभी आत्मा का 
कभी परमात्मा का था सम्बंध 
आज क्यों पत्थरों में बदला 
क्यों मैं कभी ईश्वर  बना 
कभी मैं बना पत्थर 
कभी इंसान  भी बना पत्थर