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Wednesday, May 25, 2011

सफ़र पर कुछ और आगे आना हुआ ,

मुदत से दुआ कोई आज काबुल हुई ,

फिर एक मर्दाफा कोई महफ़िल कायल हुई ,

आज फिर महफ़िल में उनका आना जो हुआ ,

नज़रो से नजरो का मिलना हुआ ,

शमा जो बुझ गई थी ,फिर से रोशन  शमा हुआ ,

पल भर भी ठहेरे न आज भी ,

अपनी फितरत से मजबूर ,

फिर रुसवा कर महेफिल को उनका जाना हुआ ,

आज फिर कुछ अधुरा ही सफ़र पर कुछ और आगे आना हुआ ,


2 comments:

  1. reena malik ji bhadas se aapke blog par aana hua aur ab main aapki pratibha ko anya bloggars ke samne lane ke liye aapke blog ko ye blog achchha laga par le rahi hoon aap bhi aayen aur apne vicharon se kritarth karen.

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  2. बहुत ही सुन्दर,शानदार और उम्दा प्रस्तुती!

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