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Thursday, September 22, 2011

बरस ने दो


आज बरस के बरसात बरस ने दो
भरा जो गुब्बार बह जाने दो
हो जाने दो खाली आज इन काले बदलो को
मायूसी को आज बरसने  दो ...
हाँ ...इसी से कोई बंजर ज़मी लहराई होगी ...
हाँ ...इसी से कोई कलि खिलखिलाई होगी ,
इसी मायूसी से कोई बादल बना होगा
 
फिर किसी की फ़िक्र में उमड़ा आज बरसात को ...
आज इसे बरसने दो ...
मेरे दिल को जी भर कर रोने दो ...
क्या पता किसी की दुआ का असर होगा
जो इन अश्को का बहना होगा ...
इस बरसात को बरसने दो मेरे अश्को को आज बहने दो ...बहने दो ...,

3 comments:

  1. बरसने दो.....
    अश्‍कों को बहने दो......

    गहरे जज्‍बात।
    सुंदर तस्‍वीर।

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  2. जितने खूबसूरत शब्द हैं उनते ही उन्नत भावों से सजाया है. शब्द नहीं हैं मेरे पास बयान करने के लिए
    ......कविता अच्छी लगी ।

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